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‘नो डिटेंशन पॉलिसी’ खत्म, पहले फेल होने वाले को दूसरी क्लास में कर दिया जाता था प्रमोट

‘नो डिटेंशन पॉलिसी’ खत्म, पहले फेल होने वाले को दूसरी क्लास में कर दिया जाता था प्रमोट

5वीं और 8वीं में फेल होने वाले बच्चे अब प्रमोट नहीं किए जाएंगे, 2 महीने में दोबारा एग्जाम होगा

( KOROTANY ) JALANDHAR PUNJAB INDIA, 5वीं और 8वीं के एग्जाम में फेल होने वाले स्टूडेंट्स को अब पास नहीं किया जाएगा। केंद्र सरकार ने सोमवार को ‘नो डिटेंशन पॉलिसी’ खत्म कर दी है। पहले इस नियम के तहत फेल होने वाले स्टूडेंट्स को दूसरी क्लास में प्रमोट कर दिया जाता था। सरकार के नए नोटिफिकेशन के मुताबिक फेल होने वाले स्टूडेंट्स को 2 महीने के अंदर दोबारा एग्जाम देने का मौका दिया जाएगा। अगर वे दोबारा फेल होते हैं, तो उन्हें प्रमोट नहीं किया जाएगा, बल्कि जिस क्लास में पढ़ रहे थे उसी में दोबारा पढ़ेंगे। सरकार ने इसमें एक प्रावधान भी जोड़ा है कि ठवीं तक के ऐसे बच्चों को स्कूल से निकाला नहीं जाएगा। केंद्र सरकार की नई पॉलिसी का असर केंद्रीय विद्यालयों, नवोदय विद्यालयों और सैनिक स्कूलों सहित करीब 3 हजार से ज्यादा स्कूलों पर होगा। 16 राज्य और 2 यूटी (दिल्ली और पुडुचेरी) नो-डिटेंशन पॉलिसी पहले से ही खत्म की जा चुकी है। शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक स्कूली शिक्षा राज्य का विषय है, इसलिए राज्य इस संबंध में अपना निर्णय ले सकते हैं।

2018 में लोकसभा में बिल पास हुआ था

जुलाई 2018 में लोकसभा में राइट टू एजुकेशन को संशोधित करने के लिए बिल पेश किया गया था। इसमें स्कूलों में लागू ‘नो डिटेंशन पॉलिसी’ को खत्म करने की बात थी। इसके अनुसार 5वीं और 8वीं क्लास के स्टूडेंट्स के लिए रेगुलर एग्जाम्स की मांग की गई थी। इसी के साथ फेल होने वाले स्टूडेंट्स के लिए दो महीने के अंदर री-एग्जाम कराने की भी बात थी। 2019 में ये बिल राज्य सभा में पास हुआ। इसके बाद राज्य सरकारों को ये हक था कि वो ‘नो डिटेंशन पॉलिसी’ हटा सकते हैं या लागू रख सकते हैं। यानी राज्य सरकार ये फैसला ले सकती थीं कि 5वीं और 8वीं में फेल होने पर छात्रों को प्रमोट किया जाए या क्लास रिपीट करवाई जाए।

इसलिए किया पॉलिसी में किया बदलाव…

2010-11 से 8वीं क्लास तक एग्जाम में फेल होने के प्रावधान पर रोक लगा दी गई थी। मतलब यह कि बच्चों के फेल होने के बावजूद अगली क्लास में प्रमोट कर दिया जाता था, लेकिन इससे देखा गया कि शिक्षा के लेवल में धीरे-धीरे गिरावट आने लगी। जिसका असर 10वीं और 12वीं की बोर्ड एग्जाम्स पर पड़ने लगा। काफी लंबे समय से इस मामले पर विचार-विमर्श के बाद नियमों में बदलाव कर दिया गया।